इसके बाद कल की चिंता नहीं करोगे || Buddha Moral Story in Hindi || Buddha Life Lesson

By | February 3, 2022

एक सेठ था उसके पास बहुत संपत्ति थी | वह अपने कारोबार से बहुत संतुष्ट था | अचानक एक दिन उसने हिसाब लगाया तो पता चला कि वह संपत्ति उसके बच्चों तक के लिए काफी होगी |

 

 

लेकिन बच्चों के बच्चों का क्या होगा..??

 

 

इस विचार के आते ही सेठ भारी चिंता में डूब गया | संयोग से उन्हीं दिनों महात्मा बुद्ध उस नगर में थे | सेठ उनके पास पहुंचा और बोला :-

 

 

 

महाराज मुझे इतनी संपत्ति चाहिए कि मैं भोगूँ, मेरे बच्चे भोगें और उनके बच्चे भोगें और फिर भी वह कभी खत्म ना हो |

 

 

बुद्ध ने कहा ऐसा ही होगा पर इसके लिए तुम्हें एक काम करना होगा |

 

 

तुम्हारे घर के पास एक टूटी फूटी झोपड़ी में सास बहू रहती हैं कल उनको 1 दिन के खाने जितना सीधा भोज्य सामग्री दे आना बस तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी |

 

 

सेठ की खुशी का ठिकाना ना रहा | उसकी रात बड़ी मुश्किल से कटी | दिन निकलते ही वह सीधा लेकर झोपड़ी में पहुंचा | उसने वहां देखा सास ध्यान में लगी है, बहू झोपड़ी की सफाई कर रही है सेठ ने बहू से कहा :-

 

 

 

यह लो मैं तुम्हारे लिए दाल, आटा, घी, नमक लाया हूं | बहू ने नजर उठाकर उसकी ओर देखा और बोली हमें नहीं चाहिए हमारे पास आज के लिए खाना है |

 

 

 

सेठ ने कहा तो क्या हुआ कल काम आ जाएगा |

 

 

बहु बोली हम अगले दिन के लिए संग्रह नहीं करते भगवान हमें रोज देता है |

 

 

यह सुनकर सेठ आवाक रह गया उसने सोचा एक ओर ये लोग हैं जो कल की चिंता नहीं करते और दूसरी ओर मैं हूं जो बच्चों के बच्चों की चिंता में मरा जा रहा हूं उसकी आंखें खुल गई |

 

 

फिर उसने धन की लालसा नहीं की अब उसे महात्मा बुद्ध की बात समझ आ चुकी थी |

 

 

बुद्धं शरणं गच्छामि

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