काम करने से खुद को रोक नहो पाओगे || Life Lessons By Buddha || Buddha MoraL Story in Hindi

By | February 3, 2022

एक दिन गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ भ्रमण कर रहे थे तभी एक शिष्य ने पूछा सच्ची मेहनत की परिभाषा क्या है? क्या आप मेरी इस जिज्ञासा का समाधान करेंगे..??

 

 

 

अवश्य तुम यहां कथा सुनो, इससे स्वयं मेहनत की परिभाषा जान जाओगे कहते हुए भगवान बुद्ध ने एक कथा प्रारंभ की :-

 

 

 

किसी गांव में एक किसान रहता था उसकी थोड़ी सी खेती-बाड़ी थी उससे उसे जो कुछ मिल जाता उससे ही वह अपनी गृहस्थी की गुजर-बसर कर लेता था | कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलता था |

 

 

 

संयोग से उस किसान का एक बैल मर गया | बेचारा बड़ी परेशानी में पड़ गया | खेत को बोना ज़रूरी था पर बोये कैसे..? बैल तो एक ही रह गया था? उसने बहुत सोचने के पश्चात एक फैसला किया |

 

 

 

हल के जोड़े में एक ओर बैल जोड़ा और दूसरी ओर अपनी स्त्री को और फिर काम करने लगा | उसी समय वहां का राजा अपनी रानी के साथ अपने रथ पर वहाँ से गुजरा | अचानक उसकी निगाह हल पर गई | जिसके जोड़े में एक ओर बैल और दूसरी ओर उसकी स्त्री थी | उसे बड़ा आश्चर्य हुआ साथ ही दुख भी |

 

 

 

उसने रथ को रुकवाया और किसान के पास जाकर पूछा :-

 

 

 

यह तुम क्या कर रहे हो.? किसान ने निगाह उठाकर उसकी ओर देखा और बोला “मेरा एक बैल मर गया है और खेत को बोना जरूरी है”

 

 

राजा ने कहा ” अरे भाई भला स्त्री से भी बैल का काम लिया जाता है”

 

 

 

किसान बोला भला और क्या करूं उपाए ही क्या है..?

 

 

राजा ने कहा तुम मेरा एक बैल ले लो |

 

 

किसान बोला मेरे पास इतना समय नहीं है इतना कहकर उसने बैल को आगे बढ़ा दिया |

 

 

राजा ने कहा सुनो भाई तुम अपनी स्त्री को बैल लाने के लिए भेज दो जब तक वह आए तब तक मैं इसके स्थान पर काम करूंगा |

 

 

 

किसान की स्त्री ने कहा तुम तो बैल देने को तैयार हो पर तुम्हारी पत्नी ने इंकार कर दिया तो ..??

 

 

 

राजा बोला ऐसा नहीं होगा |

 

 

 

किसान राजी हो गया | उसकी स्त्री राजा के यहां बैल लेने चली गई और राजा ने हल का जोड़ा अपने कंधे पर रख लिया |

 

 

 

किसान की स्त्री ने जब रानी के पास जाकर राजा की बात कही तो वह बोली ” बहना एक बैल से कैसे काम चलेगा तुम्हारा बैल कमजोर है, हमारा बैल मजबूत है दोनों साथ काम नहीं कर सकेंगे तुम हमारे दोनों बैलों को ले जाओ”

 

 

 

स्त्री बड़ी लज्जित हुई उसे तो डर था कि कहीं वो एक बैल भी देने से भी इंकार ना कर दे |

 

 

 

 

और वो एक छोड़ दोनों को देने के लिए रानी तैयार थी | स्त्री बैल लेकर आई और पूरे खेत की बुआई हो गई |

 

 

 

कुछ समय बाद फसल उगी | किसान ने देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ | सारे खेत में अनाज पैदा हुआ लेकिन जितनी जमीन में राजा ने हल चलाया था और उसका पसीना गिरा था उतनी जमीन में मोती उगे थे |

 

 

 

यह करामात सच्ची मेहनत की थी | जहां राजा जनता की सेवा में अपना पसीना बहाता है वहां ऐसा ही फल मिलता है |

 

 

 

गौतम बुद्ध कथा समाप्त करते हुए बोले “कहो शिष्य क्या अब तुम्हारी जिज्ञासा शांत नहीं हुई..??”

 

 

अवश्य प्रभु मैं समझ गया कि सच्ची मेहनत की परिभाषा क्या है….!!

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