किसी की मदद करने से पहले ये देख लेना🤬Buddha MoraL Story in Hindi || Buddhism Story in Hindi

By | February 5, 2022

मानव सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है | तथागत अपने शिष्यों को मानव सेवा का मूल मंत्र समझा रहे थे | इसी संदर्भ में उन्होंने शिष्यों को एक कथा सुनाई |

 

 

 

एक राजा भेस बदलकर रात के समय भ्रमण किया करता था कि कहीं कोई अधिकारी उनकी प्रजा को सता तो नहीं रहा है, कोई दुखी तो नहीं है या कोई बदमाश लुटेरा कहीं इधर-उधर घूम तो नहीं रहा है |

 

 

 

एक रात भ्रमण करते हुए राजा नदी के किनारे पहुंचा | सोचता की शायद कोई बदमाश पकड़ में आ जाए उसने देखा कि वहां एक युवक लेटा हुआ है | राजा ने पास जाकर पूछा ” तुम कौन हो?”

 

 

 

युवक तो पहले एक अजनबी को इतनी रात घोड़े पर देख कर सहम गया और बोला कि मैं लक्ष्मीबाई का दामाद हूँ | अपनी घरवाली को लेने जा रहा था पर मुझे इतनी जोर का बुखार चढ़ा कि मैं एक कदम भी चल नहीं सकता | सोचा रात को यहां आराम कर लूं तो सवेरे चलने लायक हो जाऊंगा |

 

 

 

राजा ने उसके माथे पर हाथ रखा तो वास्तव में मारे बुखार से वह तप रहा था | राजा ने कहा जाड़े के दिन है यहाँ ऐसे खुले वातावरण में नदी के किनारे अकेले रहना ठीक नहींं | चलो मैं तुम्हें पहुंचाए देता हूं |

 

 

 

राजा भेस बदले हुए था इसलिए युवक पहचान नहीं पाया | उसे उठाकर बैठाते हुए राजा बोला ” तुम बीमार हो घोड़े पर बैठ जाओ मैं घोड़े की लगाम पकड़कर साथ – साथ चलता हूं”

 

 

 

सहारा देकर उसने बीमार युवक को घोड़े पर बैठा दिया और लक्ष्मी के घर की ओर चल दिया | रास्ते में युवक से पूछताछ में उसने मालूम कर लिया कि वह राज महल में काम करने वाली लक्ष्मीबाई का दामाद है | राजा उसे लेकर लक्ष्मी के घर पहुंचा | दरवाजा खटखटा कर उसने लक्ष्मी को आवाज दी |

 

 

 

दरवाजा खोलते ही लक्ष्मीबाई ने जो दृश्य देखा वह अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सकी | वह राजा के पैरों में गिर पड़ी और क्षमा मांगने लगी | राजा ने कहा ” लक्ष्मी तुम यह क्यों भूल जाती हो कि मैं राजा बाद में हूं और मानव पहले हूं मानव होने के नाते मानवता मेरा पहला धर्म है “|

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