कुछ सच्ची और अच्छी बातें | Kuch sacchi or acchi baaten by Rohit Kumar

By | June 5, 2021

1. वो जब देने पर आए तो किसी का बस नहीं चलता और जब लेने पर आए तो कोई रोक नहीं सकता |

 

 

2. शहरों का वीरान होना कुछ यूं गजब कर गया बरसो पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया |

 

 

3. रिश्ता कोई भी हो कल दूरी भी हो सकती है वजह कोई मजबूरी भी हो सकती है |

 

 

4. इंसान का स्वभाव इस तरह है जो लेकर जाना है उसे छोड़ रहा है और जो यहीं रह जाना है उसे जोड़ रहा है |

 

 

5. लोगों को पहचानना ऐसे भी मुश्किल था अब मास्क ने और मुश्किल कर दिया |

 

 

6. जिंदगी के हिसाब किताब भी बड़े अजीब थे जब तक हम अजनबी थे ज्यादा करीब थे |

 

 

7. इसलिए तो यहां अजनबी हूं मैं तमाम लोग जुड़ गए फिर भी अकेला हूं मैं |

 

 

8. तकदीर के इरादों पर शिकवा ना करे बंदे तू अभी इतना समझदार कहाँ कि रब के इरादे को समझे |

 

 

9. कभी भी किसी की शक्ल पर मत जाना रफ़्तार अक्सर खून में हुआ करती है |

 

 

10. दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक है समझदारों को समझ पाना |

 

 

11. समय जब करवट लेता है तब तालियां नहीं ज़िन्दगियाँ पलट जाती हैं इसलिए अपने बुरे समय में सब्र करें और अच्छे समय में गुरूर ना करें |

 

 

12. रिश्तों को शिकवों से ज्यादा खामोशियों से खतरा होता है |

 

 

13. कुछ ख्वाहिशें हैं कुछ फरमाइशें हैं दो पल की है जिंदगी न जाने कितनी आजमाइशें हैं |

 

 

14. हम सब एक दिन महज़ याद बनकर रह जाएंगे कोशिश कीजिएगा कि यादें अच्छी बनें |

 

 

15. गुरुर किसी बात का ना करें मरने के बाद आपके अपने भी आप को छूकर हाथ जरूर धोयेंगे |

 

 

 

 

16. रिश्ते, दोस्त और जीवनसाथी चिमटे की तरह होना चाहिए पात्र चाहे कितना भी गर्म क्यों ना हो पर उसे छोड़े नहीं |

 

 

 

17. मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है, उम्र के साथ जिंदगी को ढंग बदलते देखा है, वो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान, उनको भी पांव उठाने के लिए सहारे को तरसते देखा है, जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग, उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते देखा है, जिनके हाथों के जरा से सारे से टूट जाते थे पत्थर, उन्ही हाथों को पत्तों की तरह थर थर काँपते देखा है, जिनकी आवाज से बिजली के कड़कने का होता भरम, उनके होठों पर भी जबरन चुप्पी का ताला लगा देखा है, ये जवानी ये ताकत ये दौलत सब कुदरत की इनायत है इनके रहते हुए भी इंसान को बेजान हुए देखा है अपने आज पर इतना ना इतराना मेरे यारों, मैंने वक्त की धारा में अच्छे अच्छों को मजबूर होते देखा है कर सको तो किसी को खुश करो क्योंकि दुख देते हुए तो मैंने हजारों को देखा है |

 

 

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