कोई हमें गाली दे तो क्या करें | Gautam Buddha Story | Gautam Buddha Moral Story | Buddha Life Lesson

By | February 11, 2022

बहुत पुरानी बात है गौतम बुद्ध किसी शहर में प्रवास कर रहे थे | उनके कुछ शिष्य भी उनके साथ थे | उनके शिष्य शहर में एक घूमने निकले तो शहर के लोगों ने उन शिष्यों को बहुत बुरा – भला कहा | शिष्यों को बहुत बुरा लगा और वो वापस लौट गए |

 

 

गौतम बुद्ध ने जब देखा कि उनके सभी शिष्य बहुत क्रोध में दिख रहे हैं तो उन्होंने पूछा क्या बात है ? आप सभी इतने तनाव में क्यों दिख रहे हैं ?

 

 

 

तभी एक शिष्य क्रोध में बोला ” हमें यहां से तुरंत प्रस्थान करना चाहिए जब हम बाहर शहर में घूमने गए तो यहां के लोगों ने बिना वजह जाने हमें बुरा भला कहा | जहां हमारा सम्मान ना हो वहां हमें एक पल भी नहीं रहना चाहिए यहाँ के लोग दुर्व्यवहार के बदले और कुछ भी नहीं जानते हैं |”

 

 

 

गौतम बुद्ध ने मुस्कुरा कर कहा ” क्या किसी और जगह पर तुम सदव्यवहार की उपेक्षा रखते हो ?”

 

 

 

शिष्य बोला ” इस शहर से तो भले लोग ही होंगे वहां पर |”

 

 

 

गौतम बुद्ध बोले कि किसी जगह को सिर्फ इसलिए छोड़ देना गलत होगा कि वहां के लोग दुर्व्यवहार करते है हम तो संत हैं हमें तो कुछ ऐसा करना चाहिए कि जिस स्थान पर भी जाएं उस स्थान को तब तक ना छोड़ें जब तक अपनी अच्छाइयों से वहां के लोगों को सुधार ना दें | हम जिस भी स्थान पर जाएं वहाँ के लोगों का कुछ ना कुछ भला करके ही लौटें | हमारे अच्छे व्यवहार के बाद वो कब तक बुरा व्यवहार करेंगे | आखिर में उन्हें सुधरना ही होगा | वास्तविकता में संत का कार्य तो ऐसे लोगों को सुधारना ही होता है | सही चुनौती वह है जब हम विपरीत परिस्थितियों में खुद को सही साबित कर सकें |

 

 

 

यह सभी सभी बातें सुनकर बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद ने कहा ” उत्तम व्यक्ति किसे कहते हैं ?”

 

 

 

इस पर बुद्ध ने जवाब दिया ” जिस प्रकार युद्ध में बढ़ता हुआ हाथी चारों तरफ के तीर सहते हुए भी आगे बढ़ते रहता है ठीक उसी तरह एक उत्तम व्यक्ति भी दूसरों के अपशब्दों को सहते हुए अपना कार्य करता रहता है | खुद को वश में रखने वाले प्राणी से उत्तम कोई भी और नहीं हो सकता |”

 

 

 

गौतम बुद्ध की बात शिष्यों को अच्छी तरह से समझ में आ गई और उन्होंने वहां से जाने का इरादा त्याग दिया |

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