(गौतम बुद्ध) इसके बाद कभी दुखी नहीं होगे || Gautam Budhha Lession || Gautam Buddha Moral Story

By | February 3, 2022

एक दिन गौतम बुद्ध ने एक दुखी व्यक्ति को देखा व्यक्ति बुद्ध के चरणों में गिरकर अपने दुख दूर करने का उपाय जानना चाहते थे |

 

 

गौतम बुद्ध ने उस व्यक्ति को अपने पास बैठाया और बोले :-

 

 

तुम व्यर्थ में चिंतित हो रहेते हो | सुख-दुख हमेशा नहीं रहते | मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूं ध्यान से सुनो :-

 

 

किसी नगर में एक सेठ रहता था वह बड़ा ही उदार और परोपकारी था उसके दरवाजे पर जो भी आता वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था दिल खोलकर उसकी मदद करता था |

 

 

 

एक दिन उसके यहां एक आदमी आया हाथ में एक पर्चा था जिसे वह बेचना चाहता था उसके पर्चे पर लिखा था “सदा ना रहे” |

 

 

इस पर्चे को कौन खरीदता, लेकिन सेठ ने उसे तत्काल ही खरीद लिया और अपनी पगड़ी के एक छोर में बांध लिया |

 

 

 

नगर के कुछ लोग सेठ से ईर्ष्या करते थे उन्होंने 1 दिन राजा के पास जाकर उसकी शिकायत की जिससे राजा ने सेठ को पकड़वा कर जेल में डाल दिया |

 

 

 

जेल में काफी दिन निकल गए सेठ बहुत दुखी था उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें तभी एक दिन आकास्मत सेठ का हाथ पगड़ी की गाँठ पर पड़ गया उसने गांठ को खोलकर पर्चा निकाला और उसे पढ़ा :-

 

 

पढ़ते ही उसकी आंखें खुल गई उसने मन ही मन कहा अरे तो दुख किस बात का जब सुख के दिन सदा ना रहे तो दुख के दिन भी सदा ना रहेंगे इस विचार के आते ही वह बहुत जोर से हंस पड़ा और बहुत देर तक हंसता रहा |

 

 

 

जब चौकीदार ने उसके हंसी सुनी तो उसे लगा कि सेठ दुःख के मारे पागल हो गया है उसने राजा को खबर दी राजा आया और उसने सेठ से पूछा :-

 

 

क्या बात है..??

 

 

सेठ ने राजा को सारी बात बता दी उसने कहा :-

 

 

राजन, आदमी दुखी क्यों होता है..?? सुख-दुख के दिन तो सदा बदलते रहते हैं सुख और दुख तो जीवन के दो पहलू हैं यदि आज सुख है तो हो सकता है कि कल हमें दुख का मुँह भी देखना पड़े |

 

 

यह सुनकर राजा को बोध हो गया उसने सेठ को जेल से निकलवा कर उसके घर भिजवा दिया |

 

 

सेठ आनंद में रहने लगा क्योंकि उसे ज्ञात हो गया था कि सुख के साथ-साथ दुख के भी दिन सदा नहीं रहते |

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