इसके बाद कभी आलस नहीं करोगे || Buddhist Moral Story in Hindi || Gautam Buddha Lession || Rohit Kumar

By | February 2, 2022

गौतम बुद्ध के प्रिय शिष्यों में एक ऐसा भी था जो बहुत आलसी था परंतु वे उसे भी इतना ही स्नेह करते थे जितना कि अन्य शिष्यों को |

 

 

एक दिन गौतम बुद्ध ने उस शिष्य को एक कथा सुनाते हुए कहा किसी गांव में एक ब्राह्मण रहा करता था | वह बड़ा भला आदमी था लेकिन साथ ही काम को टाला करता था |

 

 

वह यह मानकर चलता था कि जो कुछ भी होता है भाग्य से होता है, वह अपने हाथ पैर नहीं हिलाता था, वह बहुत आलसी था|

 

 

एक दिन एक साधू उसके घर आया, ब्राह्मण और उसके घर वाले ने उसका खूब आदर सत्कार किया साधु ने चलते समय खुश होकर ब्राह्मण से कहा :-

 

तुम बहुत गरीब हो, लो मैं तुम्हें एक पारसी पत्थर देता हूं | 7 दिन के बाद मैं फिर आऊंगा और इसे ले जाऊंगा, इस बीच तुम जितना सोना बनाना चाहो बना लेना ब्राह्मण ने पथरी ले ली |

 

 

साधु चला गया उसके जाने के पश्चात ब्राह्मण ने घर में लोहा खोजा उसे बहुत थोड़ा सा लोहा मिला | वह उसी को सोना बना कर बेच आया और कुछ सामान खरीद लाया |

 

 

अगले दिन स्त्री के बहुत जोर देने पर लोहा खरीदने बाजार में गया लोहा कुछ महंगा था वह घर लौट आया दो-तीन दिन बाद वह फिर बाजार गया तो पता चला कि लोहा अब पहले से भी महंगा हो गया है उसने सोचा कोई बात नहीं, एक दो दिन में भाव जरूर नीचे आ जाएगा तभी खरीद लूंगा किंतु लोहा सस्ता नहीं हुआ |

 

 

और दिन बीतते गए आठवें दिन साधु आया और उसने अपनी पथरी मांगी तो ब्राह्मण ने कहा :-

 

 

महाराज मेरा तो सारा समय यूं ही निकल गया अभी तो मैं कुछ भी सोना नहीं बना पाया आप कृपा करके इस पथरी को कुछ दिन मेरे पास और छोड़ दीजिए लेकिन साधु राजी नहीं हुआ उसने कहा :-

 

 

तुम जैसा आदमी जीवन में कुछ नहीं कर सकता तुम्हारी जगह अगर कोई और होता इसका कुछ का कुछ कर डालता जो आदमी समय का उपयोग नहीं जानता वह कभी सफल नहीं हो सकता |

 

 

ब्राह्मण पछताने लगा पर अब क्या हो सकता था | साधु पथरी लेकर जा चुका था |

 

 

उसे अपने आलस और भाग्य पर जरूरत से ज्यादा यकीन की कीमत चुकानी पड़ी इसीलिए कहा जाता है कि आलसी ही मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है |

 

 

भगवान बुद्ध के शिष्य इस कहानी का तात्पर्य समझ चुके थे उसने कसम खाई कि वह आज के बाद आलस को त्याग देगा इसके पश्चात उसने कभी आलस नहीं किया |

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