जीवन की हकीकत – Motivational Story In Hindi by Rohit Kumar

By | July 5, 2019

जीवन की हकीकत – Motivational Story In Hindi by Rohit Kumar

आज हर व्यक्ति परेशान है | बिना किसी वजह वो बेवजह पुरानी बातों को लेकर बैठा रहता है, सोचता रहता है |

वो आज कल के बारे में सोचता है और कल आने पर परसों के बारे में सोचने लगता है | वह खुद की ही सोच में उलझ गया है और कहता है कि जीवन बड़ा बेकार है सबकुछ अस्त-व्यस्त चल रहा है सोचता हूँ इसे कल ठीक करूँगा तो कल एक नई मुसीबत आके खड़ी हो जाती है |

वो ये नहीं सोचता कि वो सोचता बहुत है यही तो उसकी सबसे बड़ी परेशानी है |

रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क के किनारे कटोरा लिए एक भिखारी लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने कटोरे में पड़े सिक्कों को हिलाता रहता और साथ-साथ यह गाना भी गा रहा था कि गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा तुम उसे एक पैसा दोगे वो तुम्हे लाखों की दुआ देगा |
कटोरे और गीत की ध्वनि सुनकर आते -जाते मुसाफिर उसके कटोरे में सिक्के डाल देते ।
कुछ लोग आपस में बात करते कि इस भिखारी के पुरखे शहर के लोग बहुत नामचीन थे | लेकिन इसकी ऐसी हालत कैसे हो गई ? शायद इसके पीछे कोई बहुत गहरा राज़ छिपा है |
तभी एक व्यक्ति उस भिखारी के पास आकर पल भर के लिए थर गया । उसकी नजर भिखारी के कटोरे पर थी फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाल कुछ सौ-सौ के नोट गिने। भिखारी उस व्यक्ति को इतने सारे नोट गिनता देख उसकी तरफ टकटकी बाँध कर देखने लगा कि शायद कोई एक छोटा नोट उसे भी मिल जाए तो वो मुझे दे दे |
तभी उस व्यक्ति ने भिखारी को संबोधित करते हुए कहा कि, “अगर मैं तुम्हें हजार रुपये दूं तो क्या तुम अपना कटोरा मुझे दे सकते हो?
भिखारी अभी सोच ही रहा था कि वह व्यक्ति बोला, “अच्छा चलो मैं तुम्हें दो हजार देता हूँ |
भिखारी ने अचंभित होते हुए अपना कटोरा उस व्यक्ति की ओर बढ़ा दिया और वह व्यक्ति कुछ सौ-सौ के नोट उस भिखारी को थमा उससे कटोरा ले अपने बैग में डाल तेज कदमों से स्टेशन की ओर बढ़ गया।
इधर भिखारी भी अपना गीत बंद कर वहाँ से ये सोच कर अपने रास्ते हो लिया कि कहीं वह व्यक्ति अपना मन न बदल ले और हाथ आया इतना पैसा हाथ से निकल जाए।
और भिखारी ने इसी डर से फैसला लिया अब वह इस स्टेशन पर कभी नहीं आएगा – कहीं और जाएगा |
रास्ते भर भिखारी खुश होकर  यही सोच रहा था कि ‘लोग हर रोज आकर सिक्के डालते थे,
पर आज दौ हजार में कटोरा! वह कटोरे का क्या करेगा ?’ भिखारी सोच रहा था..?
उधर दो हजार में कटोरा खरीदने वाला व्यक्ति अब रेलगाड़ी में सवार हो चुका था। उसने धीरे से बैग की ज़िप्प खोल कर कटोरा टटोला – सब सुरक्षित था। वह पीछे छुटते नगर और स्टेशन को देख रहा था। उसने एक बार फिर बैग में हाथ डाल कटोरे का वजन भांपने की कोशिश की। कम से कम आधा किलो का तो होगा!*
उसने जीवन भर धातुओं का काम किया था। भिखारी के हाथ में वह कटोरा देख वह हैरान हो गया था। सोने का कटोरा!…..और लोग डाल रहे थे उसमें एक-दो के सिक्के |
उसकी सुनार वाली आँख ने धूल में सने उस कटोरे को पहचान लिया था। ना भिखारी को उसकी कीमत पता थी और न सिक्का डालने वालों को पर वह तो जौहरी था, सुनार था ।
भिखारी दो हजार में खुश था और जौहरी कटोरा पाकर! उसने लाखों की कीमत का कटोरा दो हजार में जो खरीद लिया था ।
 इसी तरह हम भी अपने अनमोल काया की उपयोगिता को भूले बैठे है और उसे एक सामान्य कटोरे की भाँति समझ कर कौड़ियां इक्कट्ठे करने में लगे हुए हैं ।
आप यह भूल गए हैं कि ईश्वर की बनाई हुई सबसे सुन्दर कृति में से आप एक हैं!
आपको यह जीवन जीने के लिए मिला है हर रोज़ सोचने के लिए नहीं |
आप यह भूल रहे हैं कि आपको यह मानव जीवन खुशियों में बिताने के लिए मिला है ना कि गम में |

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