जीवन रहते 2 मिनट सुन लेना | Buddha MoraL Stories in Hindi | Buddha Life Lesson

By | February 7, 2022

एक बार गौतम बुद्ध के पास एक इंसान को लेकर आए जो ठीक से देख नहीं पाता था |

 

 

 

लोगों ने बुद्ध से कहा कि बुद्ध यह हमारा मित्र है जो देख नहीं पाता है हमने इसे कई बार बताया है कि दुनिया में प्रकाश है लेकिन हमारा मित्र इसपे विश्वास ही नहीं कर रहा कि दुनिया में प्रकाश जैसी कोई चीज का अस्तित्व भी है |

 

 

 

वो कहता है पूरा विश्व अंधकार में है | अगर प्रकाश है तो मुझे उसकी आवाज सुना दो | मैं सुन तो सकता हूं | अगर प्रकाश है तुम मुझे उसका स्वाद करवा लो या मुझे उसकी सुगंध का अनुभव करवा दो | तो मैं मान लूंगा कि प्रकाश है |

 

 

 

बुद्ध अब कोई भी रास्ता नहीं बचा | प्रकाश को तो केवल आंखों से देखा जा सकता है हमारे मित्र को लगता है कि हमने प्रकाश की बातें इजात की हैं और हम इसे अंधा साबित करना चाहते हैं |

 

 

 

अब आप ही हमें रास्ता दिखाइए | हमारे मित्र को समझाइए कि प्रकाश का अस्तित्व है |

 

 

 

गौतम बुद्ध ने कहा “आप अपने मित्र को गलत इंसान के पास लेकर आए हो” आपको तो इन्हें वैध के पास ले जाना चाहिए जो इनकी आंखें ठीक कर सकें |

 

 

 

फिर भी लोगों ने बहुत प्रयास किया कि बुद्ध आप सर्ज्ञावनी हो | आप हमारे मित्र को सत्य बताएं कि प्रकाश है |

 

 

 

बुद्ध ने कहा मैं इस आदमी को यकीन नहीं दिलाऊंगा कि प्रकाश है जाति इतनी सारी अंधविश्वास से पैदा हुई हैं क्योंकि लोगों ने उन बातों को समझाने का प्रयास किया है जिसे अनुभव से ही जाना जा सकता है |

 

 

 

लोगों ने बुद्ध की बात को समझा और उस अंधे आदमी को वैद्य के पास ले गए और सौभाग्य से उसकी आंखें ठीक भी हो गई | वो इंसान बुद्ध को खोजते हुए उनके पास आया उनके पैरों में गिर कर बोला :-

 

 

 

मैं गलत था बुद्ध | प्रकाश का अस्तित्व है | मैं पहले देख नहीं पाता था | इसलिए मैंने किसी की बात का विश्वास नहीं किया | बुद्ध ने कहा तुम्हारी आंखें देख नहीं पाती थी इसलिए तुमने प्रकाश के अस्तित्व पे सवाल उठाए और तुमने लोगों की बातों का विश्वास नहीं किया इसलिए लोगों ने तुम्हारा इलाज करवाया |

 

 

 

अगर तुम बिना जाने मान लेते तो तुम प्रकाश को जान नहीं पाते | ना ही तुम्हारी आंखें ठीक हो पातीं |

 

 

 

इसलिए बुद्ध से कई ऐसे प्रश्न पूछे गए थे जिन पर वो मौन रहे, कुछ ना बोले, सिर्फ सुंदर स्माइल दी क्योंकि किसी और के सुनने से या किसी और के जानने से हम नहीं जान पाएंगे |

 

 

 

और तो और किसी भी बात पर विश्वास कर लेने से आप उस बात को कभी नहीं जान पाएंगे | हम झूठ में जिएंगे कि मुझे सब पता है लेकिन हमारा जीवन जरा सा भी बदलेगा नहीं |

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