जो दिखता है वो नहीं होता | गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी | Gautam Buddha Story in Hindi | Buddhism Story

By | March 5, 2022

महात्मा बुद्ध ने अपने एक शिष्य पर प्रसन्न होकर उसे पारस मणि देने का वचन दिया |

 

 

नियत स्थान पर बुलाकर बुद्ध ने शिष्य को उस स्थान पर खुदाई करने को कहा |

 

 

खोदने पर वहां एक लोहे की डिब्बी मिली |

 

 

बुद्ध ने शिष्य को बताया कि इसी में वो पारस मणि है जो किसी भी धातु से छूने पर उसे सोने में बदल देगी |

 

 

शिष्य ने काफी अध्ययन किया और सोचा यदि डिब्बी में पारस पत्थर होता तो कम से कम यह लोहे की डिब्बी सोने की तो बन गई होती |

 

 

इसलिए बुद्ध के विदा होते ही उसने वो डिब्बी बेकार जानकर फेंक दी | ज़मीन पर गिरने से डिब्बी खुल गई और उसमें रखा हुआ पत्थर छिटककर कहीं खो गया लेकिन छिड़कते समय उसका स्पर्श डिब्बी की बाहरी सतह से हो गया था |

 

 

अत : डिब्बी सोने की हो गई | आश्चर्य से जब शिष्य ने निकट जाकर देखा तो मालूम हुआ कि डिब्बी के अंदर पारस मणि को रखने के लिए कपड़े का अस्तर लगाया गया था इसलिए उसका सीधा स्पर्श डिब्बी से नहीं हो पाया था और वो सोने की नहीं बन पाई थी |

 

 

अब शिष्य को पछतावा होने लगा |

 

 

एक बहुत ही अच्छी कहावत है – अब पछताए क्या होई जब चिड़िया चुग गई खेत |

 

 

हम सब अपने तर्क ज्ञान को सत्य समझ बैठते हैं | लेकिन कई बार अपने तर्कज्ञान के कारण ही हम सत्य से दूर हो जाते हैं |

 

 

शिष्य अपने तर्क ज्ञान के कारण ही सत्य पारस मणि से वंचित रह गया |

 

 

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