दान पुण्य ना करने वाले ज़रूर देखें | Buddhist Story | Gautam Buddha Moral Story

By | February 14, 2022

गौतम बुद्ध अपने प्रिय शिष्यों के साथ किसी नगर में थे | लोगों ने उनका सम्मान करते हुए उन्हें बहुत साड़ी वस्तुएँ भी दीं |

 

 

कुछ दिन पश्चात बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा : चलो किसी दूसरे नगर में चलते हैं | शिष्यों ने कहा नहीं, कुछ पैसे जमा हो जाए फिर चलेंगे |

 

 

बुद्ध बोले : चलो मेरे साथ, पैसे जमा नहीं करने हमें |

 

 

दोनों गुरु और शिष्य चल पड़े |

 

 

शिष्य ने कुछ पैसे जमा कर रखे थे | उन्हें अपनी धोती में बांध रखा था | चलते चलते मार्ग में एक नदी पड़ गई | वहां एक नौका भी थी | नौका वाला पार ले जाने के लिए दो आने मांग रहा था |

 

 

बुद्ध के पास पैसे नहीं थे | शिष्य देना नहीं चाहता था | दोनों वहीं पर बैठ गए |

 

 

शाम हो गई, शाम से रात भी हो गई, नाविक अपने घर को जाने लगा तो बोला बाबा..!! तुम यहां कब तक बैठे रहोगे ?

 

 

यह जंगल है यहां रात को सिंह पानी पीने आता है अन्य पशु भी आते हैं वे तुम्हें मार डालेंगे | शिष्य ने कहा : तुम हमें पार ले चलो |

 

 

नाविक ने कहा, मैं तो एक आदमी के दो आने लिए बिना नहीं ले जा सकता |

 

 

शिष्य को सिंह का विचार आने लगा | उसने सोचा जान बचेगी तो लाखों पाएंगे | धोती से चार आने निकालकर बोला : अच्छा नहीं मानते हो तो ये लो |

 

 

नाविक ने चार आने लिए और उन्हें उस पार छोड़ आया |

 

 

उस पार जाकर शिष्य ने कहा : देखा भंते, आप तो कहते थे कि पैसा इकट्ठा करने की आवश्यकता नहीं है |

 

 

बुद्ध ने हंसते हुए कहा “सोच कर देखो बेटा, पैसा एकत्र करने से तुम्हें सुख नहीं मिला” पैसे को देने से मिला, सुख त्याग में है एकत्र करने में नहीं |

 

 

उसी तरह ज्ञान है, ज्ञान का जितना दान करोगे वो उतना बढ़ेगा |

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