दिन भर बेचैनी रहती है तो इसे सुनो 🚩Gautam Buddha Story in Hindi | Buddha MoraL Story Hindi | Buddhism Story

By | March 6, 2022

एक दिन एक व्यक्ति बुद्ध के पास पहुंचा | वो बहुत अधिक तनाव में था | अनेक प्रश्न उसके दिमाग में घूम – घूम कर उसे परेशान कर रहे थे | आदमी मृत्यु के बाद कहां जाता है ?

 

 

 

सृष्टि का निर्माता कौन है ? स्वर्ग, नरक की अवधारणा कहां तक सच है ? और ईश्वर है या नहीं ? इन प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल रहे थे |

 

 

 

जब वो बुद्ध के पास गया तो उसने देखा कि बुद्ध को कई लोग घेरकर बैठे हुए हैं | बुद्ध उन सभी के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान अत्यंत सहज भाव से कर रहे हैं |

 

 

 

काफी देर तक यह क्रम चलता रहा किंतु बुद्ध धैर्य पूर्वक हर एक को संतुष्ट करते रहे | बेचारा व्यक्ति वहां का हाल देख कर परेशान हो गया |

 

 

 

उसने सोचा कि इन्हें दुनियादारी के मामलों में पडने से क्या लाभ ?

 

 

 

अपना भगवत – भजन करें और बुनियादी समस्याओं से ग्रस्त इन लोगों को भगाएं |

 

 

 

किंतु बुद्ध का व्यवहार देखकर तो ऐसा लग रहा था कि मानो इन लोगों का दुख जैसे बुद्ध का अपना ही दुख है |

 

 

 

अंत में उस व्यक्ति ने पूछ ही लिया कि महाराज आपको सांसारिक बातों से क्या लेना देना ?

 

 

 

बुद्ध बोले – मैं ज्ञानी नहीं हूं और इंसान हूँ | वैसे भी वो ज्ञान किस काम का जो इतना घमंडी और आत्म केंद्रित होकर अपने अतिरिक्त दूसरों की चिंता ही ना कर सके | ऐसा ज्ञान तो अज्ञान से भी बुरा है |

 

 

 

बुद्ध की बातें सुनकर व्यक्ति की उलझन दूर हो गई | उस दिन से उसकी सोच और आचरण दोनों बदल गए |

 

 

 

दोस्तों इस कथा का सार यह है कि ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह लोक कल्याण में संलग्न हो |

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