दूसरों को रुलाने पर ये होता है || Gautam Buddha Story || Gautam Budhha Moral Story || Buddha Life Lesson

By | February 11, 2022

भगवान बुद्ध सद विचारों का प्रचार करने के लिए राजगृह लौटे लेकिन नगर में सन्नाटा था | उनके अनुयायियों ने उन्हें बताया कि भगवन् एक राक्षसी को बच्चों का मांस खाने की लत लग गई है |

 

 

 

नगर के अनेक बच्चे गायब हो गए हैं जिससे नागरिकों ने या तो नगर छोड़ दिया है या वो अपने घरों में दुबक के बैठे हैं | भगवान बुद्ध को यह भी पता चला कि उस राक्षशी के कई बच्चे भी हैं |

 

 

 

एक दिन बुद्ध राक्षसी की उपस्थिति में उसके बच्चों को खेलने के बहाने उसको अपने साथ ले आए | राक्षसी जब घर लौटी तो अपने बच्चों को गायब पाकर बेचैन हो उठी |

 

 

 

सबसे छोटा बच्चा होने के कारण उसे अपने बालक से उसका अधिक लगाव था | बेचैनी में ही उसने अपनी पूरी रात काटी | सुबह वह उनका नाम जोर-जोर से पुकारकर उन्हें ढूंढने लगी |

 

 

 

बिछड़ने के दर्द से वह तड़प रही थी | अचानक उसे सामने से बुद्ध की गुजरते हुए दिखाई दिए | उसने सोचा बुद्ध सच्चे संत हैं जरूर अंतर्यामी होंगे उनके पैरों में गिर कर बोली “भगवन मेरा बच्चा कहां है यह बताइये, उसे कोई हिंसक पशु ना खा पाए ऐसा आशीर्वाद दीजिए”

 

 

 

बुद्ध ने कहा इस नगर के अनेक बच्चों को तुमने खा लिया कितनी ही इकलौती संतानों को भी तुमने नहीं बक्शा है क्या तुमने कभी सोचा कि उनके माता-पिता कैसे जिंदा रह रहे होंगे?

 

 

 

बुद्ध के वचन सुनकर वो पच्चाताप की अग्नि में जलने लगी | उसने संकल्प लिया कि वह अब हिंसा नहीं करेगी |

 

 

 

गौतम बुद्ध ने उसे समझाया कि वास्तविक सुख, दूसरों को दुख देने या दूसरों का रक्त बहाने में नहीं अपितु उन्हें सुख देने में हैं | उन्होंने उसका बच्चा वापस कर दिया |

 

 

 

गौतम बुद्ध से एक अनुयाई ने कहा प्रभु मुझे आपसे एक निवेदन करना है बुद्ध बोले बताओ क्या कहना है??

 

 

अनुयायी बोला मेरे वस्त्र पुराने हो चुके हैं, अब ये पहनने लायक नहीं रहे कृपया मुझे नए वस्त्र देने का कष्ट करें |

 

 

 

बुद्ध ने अनुयायी के वस्त्र देखें वो सचमुच झीण हो चुके थे,

 

 

 

और जगह-जगह से घिस चुके थे इसलिए उन्होंने एक अन्य अनुयायी को नए वस्त्र देने का आदेश दे दिया |

 

 

 

कुछ दिनों बाद जब बुद्ध अनुयायी के घर पहुंचे तो बुद्ध बोले क्या तुम अपने नए वस्त्र में आराम से हो ?तुम्हें और कुछ तो नहीं चाहिए ?

 

 

 

अनुयायी बोला ” धन्यवाद प्रभु मै इन वस्त्रों में बिल्कुल आराम से हूं मुझे और कुछ नहीं चाहिए”

 

 

तब बुद्ध बोले अब जबकि तुम्हारे पास नए वस्त्र हैं तो तुमने पुराने वस्त्रों का क्या किया ?

 

 

अनुयायी बोला ” मैं उन्हें अब ओढ़ने के लिए प्रयोग कर रहा हूं”

 

फिर बुद्ध बोले “तो तुमने अपनी पुरानी ओढ़नी का क्या किया” ?

 

जी मैंने उसे खिड़की पर पर्दे की जगह लगा दिया हूं |

 

तब बुद्ध बोले “तो क्या तुमने पुराने परदे फेर दिए ??”

 

अनुयायी बोला जी नहीं मैंने उनके चार टुकड़े किए और उनका प्रयोग रसोई में गर्म पतीले को आग से उतारने के लिए कर रहा हूं |

 

फिर बुद्ध बोले ” तो फिर रसोई के पुराने कपड़ों का क्या किया ?”

 

अनुयायी बोला अब मैं उन्हें पोछा लगाने के लिए प्रयोग करूंगा |

 

फिर बुद्ध बोले ” तो तुम्हारा पुराना पोछा क्या हुआ ?”

 

फिर अनुयाई प्रभु वो इतना तार-तार हो चुका था कि उनका कुछ नहीं किया जा सकता था इसलिए मैंने उनका एक – एक धागा अलग कर दीए की बातियाँ तैयार कर लीं | उन्हीं में से एक कल रात आपके कक्ष में प्रकाशित थे |

 

बुद्ध अनुयायी से संतुष्ट हो गए | वो प्रसन्न थे कि उनका शिष्य वस्तुओं को बर्बाद नहीं करता और उसमें समझ है कि उनका उपयोग किस तरह से किया जा सकता है |

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