पराई औरत को कैसे छुएँ || Gautam Buddha MoraL Story || Buddha Life Lesson

By | February 4, 2022

दोस्तों आज मैं आपको दो भिक्षुक की कहानी सुनाने जा रहा हूं जो कि भगवान बुद्ध से मिलने जा रहे थे |

 

 

 

एक बार भगवान बुद्ध के दो शिष्य उनसे मिलने जा रहे थे | पूरे दिन का सफर था | चलते चलते रास्ते में एक नदी पड़ी | उन्होंने देखा कि नदी में एक स्त्री डूब रही है |

 

 

बौद्ध भिक्षुओं के लिए स्त्री का स्पर्श वर्जित माना जाता है | ऐसी दशा में क्या होगा चलिए आगे जानते हैं |

 

 

उन दोनों भिक्षुओं में से एक ने कहा हमें धर्म की मर्यादा का पालन करना चाहिए | स्त्री डूब रही है तो डूबे हमें हमें क्या..?

 

 

 

लेकिन दूसरा भिक्षुक अत्यंत दयावान था उसने कहा हमारे रहते कोई इस तरह मरे यह तो मैं सहन नहीं कर सकता | इतना कहकर वो पानी में कूद पड़ा और डूबती हुई स्त्री को पकड़ लिया |

 

 

 

कुछ समय बाद कंधे का सहारा देकर उसे किनारे पर ले आया | दूसरे भिक्षु ने उसकी बड़ी उपासना की | रास्ते में बार-बार कहता रहा कि मैं जाकर तथागत से कहूंगा कि आज तुमने मर्यादा का उल्लंघन करके कितना बड़ा पाप किया है |

 

 

 

दोनों बुद्ध के सामने पहुंचे तो दूसरे भिक्षु ने एक साँस में सारी बात कह सुनाई |

 

 

भंते मैंने इसको बहुत रोका पर यह नहीं माना | बड़ा भयंकर पाप किया है इसने |

 

 

बुद्ध ने बड़े ध्यान से उसकी बात सुनी और फिर पूछा ” इस भिक्षु द्वारा उस स्त्री को कंधे पर बाहर लाने में कितना समय लगा होगा..??”

 

 

वह भिक्षुक बोला ” कम से कम 15 मिनट तो लग ही गए होंगे”

 

 

बुद्ध ने पूछा इस घटना के बाद तुम लोगों को यहां आने में कितना समय लगा..??

 

 

भिक्षु ने हिसाब लगाकर उत्तर दिया “यही कोई 6 घंटे”

 

 

बुद्ध ने कहा “इस बेचारे ने तो स्त्री को 15 मिनट ही अपने कंधे पर रखा लेकिन तू तो उसे 6 घंटे से अपने मन में बैठे हुए हैं बोल दोनों में बड़ा पापी कौन है ?

 

 

बेचारा भिक्षु निरुत्तर हो गया उसकी मुंह की बातें छीन गई |

 

 

इसलिए कहा गया है मन भर कर जियो मन में भरकर मत जियो |

Leave a Reply

Your email address will not be published.