बुरे समय में कभी नहीं फँसोगे || Buddha MoraL Story in Hindi || Buddhism Story in Hindi

By | February 5, 2022

भगवान बुद्ध अंतिम समय तक अपने शिष्यों के साथ रहे | एक बार वह एक निर्जन वन से गुजर रहे थे | वहां उन्होंने एक शीशम के वृक्ष के नीचे कुछ पत्ते उठाए और अपने शिष्यों से पूछा :-

 

 

 

भिक्षुओं बताओ मेरे हाथ के पत्ते ज्यादा हैं या इस वन के…??

 

 

 

शिष्य ने कहा “भगवन् के पत्ते तो बहुत कम है वन के पत्ते ज्यादा हैं”

 

 

 

भगवान बुद्ध ने मुस्कुरा कर कहा “भिक्षुओं इस संसार में ज्ञान का अपार भंडार है इस वन के पत्तों जैसा” मैं तो तुम्हें अपने हाथों में पकड़े इन थोड़े से पत्तों जितना ही ज्ञान दे सका | आओ तुम्हें स्वयं ज्ञान अर्जन करना होगा |

 

 

 

ज्ञान ही मनुष्य को महान बनाता है |

 

 

 

भिक्षुओं ने पूछा “भगवन्…!! महान क्या है..??

 

 

 

बुद्ध ने कहा धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है और वही सबसे महान है | धर्म का अर्थ सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त प्रकृति का नियम है | यही कार्य और कारक भाव को निरंतर चलाने वाली प्रक्रिया है | धर्म ही सत्य है और धर्म ही न्याय है | बड़ा और महान वही है जो क्रोध तथा अहंकार को प्रेम से और झूठ को सत्य से जीतता है | वही सबसे महान होता है |

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