भगवान हैं या नहीं ? बुद्ध ने इसपर एकदम सटीक तर्क दिया है..!! Does Really God Exist ??

By | February 7, 2022

बुद्ध ने अपने जीवन काल में अपने प्रवचनों से मानव जीवन में एक क्रांति सी ला दी थी और हम जानते भी हैं भगवान बुद्ध द्वारा कही गई उन सभी बातों में जीवन जीने की कला की चाबी छुपी हुई है पर शर्त यह है कि आप बुद्ध द्वारा कही गई बातों का सही अर्थ निकाल पाएं | उनके जीवन में घटी सभी घटनाओं से आज भी हमें कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है ऐसी ही एक घटना के बारे में आज मैं आपको बताऊंगा |

 

 

बुद्ध के समय में अक्सर उनसे एक सवाल पूछा जाता था कि ईश्वर है या नहीं है…?

 

 

और बुद्ध द्वारा हर बार एक अलग जवाब दिया जाता था और हमारे कई भी viewers का भी यह सवाल है कि आखिर भगवान बुद्ध ईश्वर को मानते भी थे या नहीं..??

 

 

ईश्वर के बारे में पूछा गया यह प्रश्न आज भी उतना ही खतरनाक है जितना कि भगवान बुद्ध के समय में था | लोगों द्वारा यह प्रश्न बुद्ध से कई बार पूछा गया लेकिन बुद्ध ने इस बात का कभी स्पष्टीकरण नहीं किया |

 

 

 

एक बार की बात है कोई जिज्ञासु बुद्ध के प्रवचन ओं को सुन रहा था और वह जिज्ञासु उनकी बातों से सहमत भी था | वो मानता था कि बुद्ध ज्ञानी पुरुष हैं तो एक बार बहुत ध्यान में बैठे हुए थे और वह व्यक्ति बुद्ध के पास गया और पूछा :-

 

 

हे बुद्ध कृपया करके आप मुझे ये बताएं कि ईश्वर है या नहीं ? इसके साथ ही मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इतने से प्रश्न का बिलकुल सीधे-सीधे जवाब दे दीजिए क्योंकि बुद्ध के बारे में यह बहुत प्रचलित है कि बुद्ध किसी भी सवाल का जवाब सीधे-सीधे नहीं देते थे | उनके जवाब रहस्यों से भरे होते थे | तो उस जिज्ञासु ने पूछा कि मुझे ईश्वर के बारे में आपसे सुनना है ईश्वर है या नहीं ??

 

 

बुद्ध ने उस व्यक्ति को सुना और मुस्कुराए और फिर उस जिज्ञासु से कहा चलो ठीक है मैं जवाब दूंगा लेकिन उससे पहले कुछ प्रश्नों का उत्तर मैं आपसे चाहता हूँ पहले उन प्रश्नों का जवाब आप मुझे दे दो |

 

 

उस जिज्ञासु ने कहा हां बिल्कुल आप मुझसे सवाल पूछिए | तब बुद्ध ने पहला प्रश्न यह पूछा कि “क्या तुम सूर्य को मानते हो ?”

 

 

 

अब उस जिज्ञासु ने बुद्ध की तरफ बड़ी ही अजीब तरीके से देखा और कहा कि हे बुद्ध यह किस प्रकार का प्रश्न है..!! क्या मैं कोई बालक हूं जो आप यह बालक से पूछे जाने वाला प्रश्न मुझसे कर रहे हैं सूर्य तो साक्षात प्रकट होता है | पूरी पृथ्वी को रोशनी देता है पेड़ – पौधे, कीट – पतंगे, पशु – पक्षी, जानवर और हम मनुष्य हम सबको ऊर्जा देता है सूर्य तो साक्षात है |

 

 

तब बुद्ध ने पूछा कि ईश्वर को मानने का प्रश्न क्यों आया क्योंकि जिस प्रकार सूर्य साक्षात है तब उसे मानने का कोई प्रश्न नहीं उठता तब ईश्वर के एवज में ये प्रश्न क्यों उठा? ईश्वर को मानने की क्या आवश्यकता है इसका अर्थ तो ये हुआ कि ईश्वर को लेकर आपके मन में कहीं ना कहीं संदेह है क्योंकि ईश्वर सूर्य की तरह प्रत्यक्ष नहीं है | आप ईश्वर को भी बुद्धि से ढूंढने निकले हो और बुद्धि केवल उन्हीं बातों को मान पाती है जो से प्रत्यक्ष रुप से दिखाई पड़ता है और ईश्वर कभी भी प्रत्यक्ष रूप में आपको दिखाई नहीं पड़ेगा और अगर दिख जाए तो ईश्वर नहीं होगा |

 

 

बुद्ध ने ये भी कहा कि जब तुम ईश्वर को मानते हो या नहीं मानते असल में ये प्रश्न ही गलत है और गलत प्रश्न का भला सही उत्तर कैसे दिया जा सकता है | इसीलिए इस गलत प्रश्न के पूछे जाने पर और किसी के द्वार उत्तर दिए जाने पर अगर उत्तर दिया जा सकता है तो वह उत्तर भी इस प्रश्न की तरह ही गलत होगा |

 

 

जिज्ञासु ने यह सुना और कंफ्यूज हो गया कि हे बुद्ध ये आप किस प्रकार की बातें कर रहे हैं..!!

 

मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं…

 

 

बुद्ध बोले हां अगर सीधे अर्थों में मैं कहूं तो ईश्वर को माना नहीं जा सकता बल्कि ईश्वर को जाना जा सकता है | अगर तुम्हारा प्रश्न यह होता कि मैं ईश्वर को जानना चाहता हूं तब मैं तुम्हारी मदद कर सकता था और जब तुम ईश्वर को जान जाओगे उसका स्वाद चख लोगे, तब तुम भी उस स्वाद को किसी को नहीं बता पाओगे | उस ईश्वर की सीधी व्याख्या नहीं कर पाओगे | हां लेकिन दूसरों को ईश्वर का स्वाद चखने में मदद जरूर कर सकते हो | तुम अपना अनुभव किसी को दे नहीं सकते लेकिन अनुभव करवाने में उसकी सहायता जरूर कर सकते हो |

 

 

तो इसलिए आपने बुद्ध के जीवन की जितने भी किस्से कहानियां सुने होंगे वहां आपने देखा होगा की बुद्ध ने कभी भी ईश्वर के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं कहा और इसके चलते कई बार बुद्ध पर उंगलियां भी उठाई गयीं कि खुद को कुछ नहीं पता क्योंकि बुद्ध इन तरह के प्रश्नों का ठीक से उत्तर नहीं देते थे |

 

 

अब मैं आपको बताता हूं कि गौतम बुद्ध तथ्य सम्बन्धी प्रश्नों से अक्सर क्यों बचा करते थे ? तथ्य सम्बन्धी मतलब ईश्वर और आत्मा | इससे रिलेटेड प्रश्नों के उत्तर वो अक्सर नहीं देते थे और अगर कभी देना भी पड़ता था तो वह उदाहरण के माध्यम से उसे समझाने का प्रयास करते थे क्योंकि और आत्मा के बारे में कभी भी स्पष्ट जवाब दिया ही नहीं जा सकता | यह संभव ही नहीं है और मैं मानता हूं कि बुद्ध को सच में ज्ञान प्राप्त हुआ था | बुद्ध उस परमात्मा का अनुभव कर चुके थे और कोई भी व्यक्ति जो बुद्धत्व को प्राप्त हो जाता है वो ईश्वर के बारे में या ज्ञान के बारे में आपको सीधे-सीधे कभी नहीं बताता | वो आपके प्रश्न के उत्तर को बीच में ही लटका देता है क्योंकि वो चाहता है कि आप उसका स्वाद स्वयं चख लें |

 

 

बुद्ध ने कभी वो गलती नहीं की जो तथाकथित ज्ञानियों ने की | मतलब जितने भी तथाकथित ज्ञानी पुरुषों ने ईश्वर के बारे में स्पष्टीकरण किया और उनके अनुयायियों ने उनके धर्म गुरुओं द्वारा ईश्वर के द्वारा कही गई बातों को मान लिया और अपने समुदाय बना लिए फिर क्या था वो आप देख ही रहे हैं उन तथाकथित धर्मगुरुओं द्वारा दी गई प्रमाणिकता के आधार पर आज वो सभी समुदाय तलवार लिए घूम रहे हैं और उन तलवारों हथियारों के आधार पर प्रमाणित करना चाहते हैं कि मेरा ईश्वर सही है, मेरा ईश्वर सही है | तुम अपने ईश्वर भगवान को छोड़ो और हमारे को मानो क्योंकि वही सत्य है तुम्हारा ईश्वर तो झूठा है |

 

 

यही होगा अगर कोई व्यक्ति ईश्वर सीधी व्याख्या कर देगा तो अज्ञानीयों की भीड़ उसकी बात को जस का तस मान लेगी ना कि वो जानेगी | वो भीड ईश्वर का अनुभव नहीं करेगी | वो भीड़ तो केवल आपके द्वारा कही गई बातों के आधार पऱ किताबे लिख देगी और हाथों में तलवार लेकर चल पड़ेगी कि हम अपने समुदाय को बढ़ाएंगे, अपने धर्म को बढ़ाएंगे, प्रचार प्रसार करेंगे |

 

 

शायद बुद्ध ये बात जानते थे इसलिए उन्होंने कई बार ईश्वर को इनकारा भी | इनकारा इसलिए भी ताकि आपकी प्यास और भी गहरी हो सके | आप स्वयं उसे जाने | अगर बुद्ध ईश्वर के बारे में सीधे-सीधे कह देंगे तो भीड़ आंख बंद करके मान लेगी |

 

 

और ऐसे ही हमने पृथ्वी पर ना जाने कितने भगवानों, कितने ईश्वर को जन्म दे दिया है | ऐसा लगता है कि ईश्वर ने हमें पैदा नहीं किया बल्कि मनुष्य ने ईश्वर को पैदा किया है आप खुद ही देख लो आपको अपने आसपास ईश्वर के बारे में खुद ही जानने को मिल जाता है लेकिन उसका अनुभव किसी को नहीं है | ईश्वर के बारे में मैं भी आपसे कुछ खास नहीं कह सकता | मैं तो केवल आपको ध्यान सिखा सकता हूं | आप ध्यान करो उसमें गहरा उतरो | जैसे-जैसे ध्यान गहरा होगा वैसे वैसे आप के सभी प्रश्नों की हत्या होती चली जाएगी और आप उसके जानने के करीब पहुंचते चले जाओगे फिर आपको किसी भी ईश्वर को मानने की या ना मानने की आवश्यकता नहीं होगी आप स्वयं उसे जान पाओगे | अपनी स्वयं की आत्मा तक पहुंचने का द्वार आपके उस ईश्वर का द्वार है |

Category: All

Leave a Reply

Your email address will not be published.