मधुर वचन बोलना दान के सामान है🧘मधुर बोलने में कैसी गरीबी | Gautam Buddha Story in Hindi

By | March 5, 2022

एक दिन भगवान बुद्ध भ्रमण करते हुए अपने शिष्यों के साथ जंगल में गए | एक शिकारी शिकार के लिए जंगल में गया हुआ था | एक सैनिक भी जंगल में रास्ता भटक गया था |

 

 

तीनों को प्यास लगी | दूर कहीं उन्हें एक झोपड़ी दिखाई दी | उसमें एक अंधा भिक्षुक बैठा था | शिकारी वहां पहुंचा और बोला – ए अंधे मुझे पानी पिला दे | वरना तीर से तेरा जल पात्र फोड़ दूंगा |

 

 

अंधा बोला – चल भाग यहां से, शिकारी कहीं का… नहीं पिलाता पानी..!!

 

 

उसी के पीछे सैनिक आया और बोला – अंधे, पानी पिलाकर मेरी प्यास बुझा दे चाहे तो धनऔर वस्त्र ले ले |

 

 

अंधे ने चिढ़कर कहा – राजा का सैनिक है मुझे लोभ दिखाता है..! जा नहीं मिलेगा पानी..!!

 

 

तब बुद्ध भी वहां पहुंच गए | सूरदास जी, थोड़ा सा पानी प्रदान करें | तो बड़ी कृपा होगी प्यास से प्राण संकट में आ गए हैं |

 

 

अंधा बोला – मेरा सौभाग्य है कि आप मेरी कुटिया में पधारे | लीजिए जल ग्रहण कीजिए | पानी पीकर बुद्ध ने कहा आप देख नहीं सकते फिर कैसे जान गए कि पहले आया व्यक्ति शिकारी, दूसरा सैनिक और तीसरा एक साधु है ?

 

 

अंधा बोला – भंते, वाणी से ही इंसान की पहचान हो जाती है | उसे देखने की जरूरत नहीं पड़ती | बुद्ध ने उनसे विनती की, आप इन दोनों को भी पानी पिला दीजिए ताकि इनकी मन की भी आंखें खुल जाएं |

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