विश्वास का दीपक 🕯️गौतम बुद्ध की प्रेरक कहानी | Gautam Buddha MoraL Story in Hindi

By | February 15, 2022

यह कथा तब की है जब पृथ्वी पर प्रकाश नहीं था, चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था |

 

 

एक गांव के लोग सदैव अंधकार में रहते थे | लेकिन फिर भी उनके मन में अंधेरे को दूर करने की इच्छा थी | लोगों ने बहुत उपाय किए | मंत्र – श्लोक पढ़े | बूढ़े सयानों से सलाह ली | जब सब उपाय बेकार चला गया तो एक दिन बैठकर अंधेरा भगाने की समस्या पर सामूहिक चर्चा की |

 

 

 

आम सहमति से फैसला हुआ कि गांव के सब लोग अंधेरे को टोकरी में भरकर उसे खाई में डाल दें | एक ना एक दिन तो उसका अंत होकर ही रहेगा | यह बात इतनी उचित लगी कि गांव के सारे लोग अंधेरे को टोकरी में भरकर खाई में फेंकने लगे |

 

 

 

दिन, महीने, साल, युग बीत गए | ना तो अंधेरा गया और ना ही खाई भरी | लोग थक गए लेकिन हार नहीं मानी | साल दर साल हर साल हर व्यक्ति अंधेरे को टोकरी में भरकर फेंकता रहा | अंधेरे को फेंकना एक प्रथा बन गई फिर एक नई पीढ़ी आई |

 

 

 

उसे यह रिवाज़ निरर्थक लगा उस पीढ़ी का एक नौजवान एक दूसरे गांव की सुंदरी से प्यार करने लगा | वह उसकी दुल्हन बनकर गांव में आई | पहले ही दिन उसकी सास,ननंद, ससुर, जेठ सब उसके पीछे पड़ गए कि गृह प्रवेश करने से पहले पाँच टोकरी अंधेरा उस खाई में फेंको |

 

 

 

वह हँसने लगी उसने अपने वस्त्रों की गाँठ में से एक दीपक निकाला और दो पत्थर रगड़ कर अग्नि प्रज्वलित की | दीया, बाती, तेल और अग्नि के मेल से उजाला हो गया | लोग देखते ही रह गए |

 

 

 

दोस्तों हम लोग भी इसी प्रकार से अपना जीवन जी रहे हैं | हम लोगों को सब पता होते हुए भी हम लोग वही काम करते हैं जो सब ने किया है | हम लोग इस कंफर्ट जोन से बाहर निकल ही नहीं पाते | कुछ नया करने की हिम्मत ही नहीं होती |

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