🤑इसे देखने के बाद छोटा सोचना बंद कर दोगे 🧠 Think BiG You Get BiG | Powerful Motivational Video

By | February 15, 2022

क्या आप जानना चाहते हैं कि वह कौन सी चीज है जिसने आपकी नजरों में छोटा बना दिया है | वो कौन सी चीज है जो आपको वो बनने से रोकती है जो आप बन सकते हैं | आपको यह समझना चाहिए कि असफल वो व्यक्ति नहीं है जिसने कुछ बड़ा सोचा और वह उसे पा ना सका | बल्कि असफल तो वो व्यक्ति है जिसने कुछ छोटा सोचा और उसे पा लिया | एक छोटी सी कहानी से मैं अपनी बात को समझाने का प्रयास करता हूं |

 

 

 

एक बार समुन्द्र की एक मछली बाढ़ के कारण बहकर कुएँ में गिर जाती है | उस कुएं में पहले से ही कहीं मछलियां थी | उस समुद्र की मछली को देख कुएं की मछलियाँ उससे पूछती हैं तुम कौन हो और कहां से आई हो ?

 

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है कि मैं भी तुम्हारी तरह एक मछली हूं और मैं समुद्र से आई हूं | कुए की मछलियां पूछती हैं समुद्र ?

 

 

यह कौन सी जगह है ?

 

 

हमने तो आज तक इसके बारे में कभी नहीं सुना…!!

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है कि समुद्र बहुत बड़ा होता है | उन कुएँ की मछलियों में से एक मछली एक जगह से दूसरी जगह तक एक छोटी सी छलांग लगाकर पूछती है कि क्या इतना बड़ा होता है समुंदर ?

 

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है अरे नहीं… इससे बहुत बड़ा होता है समुद्र |

 

 

 

फिर उस कुएँ की दूसरी मछली , उस पहली मछली से बड़ी छलांग लगाती है और पूछती है कि क्या इतना बड़ा होता है समुद्र ?

 

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है नहीं इससे समुद्र बहुत बड़ा होता है | फिर उस कुएँ की तीसरी मछली, उन दोनों मछलियों से बड़ी छलांग लगाती है और पूछती है कि क्या इतना बड़ा होता है समुद्र ?

 

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है अरे नहीं-नहीं | इससे तो समुद्र बहुत-बहुत-बहुत बड़ा होता है |

 

 

 

फिर फिर उसमें की चौथी मछली सबसे बड़ी मछली थी कुएँ के एक छोर से यानी कुएं की एक दीवार से दूसरी दीवार तक छलांग लगा देती है और पूछती है क्या इतना बड़ा होता है समुद्र ?

 

 

 

वह समुद्र की मछली कहती है अरे मैं तुम्हें कैसे समझाऊं | समुद्र हद से ज्यादा बड़ा होता है इस पर कुएँ की सभी मछलियां समुद्र की मछली ऊपर हंसने लगती हैं और कहती हैं कि तुम झूठ बोल रही हो | क्योंकि इससे बड़ा तो कुछ होता ही नहीं |

 

 

 

दोस्तों हो सकता है कि हमें वह मछलियां मूर्ख लगे लेकिन हमारी सोच भी उन मछलियों से अलग नहीं है | हमने भी अपनी क्षमता को सीमित दीवारों में बंद कर रखा है | अगर एक बार वो मछलियां मान लेतीं हैं कि हां कुएं से बड़ा भी कुछ हो सकता है तो उनकी संभावना थी समुद्र तक पहुंचने की |

 

 

 

लेकिन उन्होंने माना ही नहीं उनकी संभावना भी समाप्त हो गई | आप सोच भी नहीं सकते कि आप क्या कर सकते हैं | पर क्योंकि आप सोच ही नहीं पाते इसलिए आप कर भी नहीं पाते |

 

 

 

बड़ी-बड़ी इमारतें हैं ना जाने आपने कितनी बार देखी होंगी लेकिन यह सभी इमारतें जमीन पर बनने से पहले मनुष्य के दिमाग में बनती हैं | अब आप कहेंगे कि सोचने से सब कुछ नहीं होता | ये बात एकदम ठीक है कि सोचने से सब कुछ नहीं होता लेकिन बिना सोचे भी तो कुछ नहीं होता |

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